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कब है करवा चौथ? बन रहा है बेहद शुभ योग, देखिए डेली अभीतक समाचार

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ऋषिकेश।कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है करवा चौथ का व्रत ओर शादीशुदा महिलाएं इस दिन अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं ओर इस दिन कन्याएं भी अच्छे वर के लिए व्रत रखती है।यह व्रत परिवार की सुख-समृद्धि के लिए भी रखा जाता है।

जय शिवाय हरि न्यास के परमाअध्य्क्ष आचार्य महंत दुर्गा राम चरण दास गिरी ने बताया करवा चौथ बृहस्पतिवार,अक्टूबर 13, 2022 को करवा चौथ पूजा मुहूर्त – शाम 06 बजकर 17 मिनट से शाम 07 बजकर 31 मिनट तक
अवधि – 01 घण्टा 13 मिनट्स करवा चौथ व्रत समय – सुबह 06 बजकर 32 मिनट से रात 08 बजकर 48 मिनट तक करवा चौथ के दिन चन्द्रोदय – 08:48 पी एम चतुर्थी तिथि प्रारम्भ – अक्टूबर 13, 2022 को सुबह 01 बजकर 59 मिनट से शुरू चतुर्थी तिथि समाप्त – अक्टूबर 14, 2022 को सुबह 03 बजकर 08 मिनट पर खत्म करवा चौथ शुभ योग करवा चौथ के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 54 मिनट से सुबह 05 बजकर 43 मिनट तक रहेगा।अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 1 मिनट से लेकर 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा।अमृत काल शाम 4 बजकर 8 मिनट से 5 बजकर 50 मिनट कर रहेगा।

करवा चौथ पूजन सामग्री

छलनी, करवा माता की तस्वीर, दीपक, अगरबत्ती, कपूर, गेहूं, बाती (रूई)लकड़ी का आसन, दक्षिणा के पैसे, हलुआ, आठ पूरियों की अठावरी, श्रृंगार का सामान, मेहंदी, महावर, सिंदूर, कंघा, बिंदी, चुनरी, चूड़ी, छलनी, बिछुआ, फूल, हल्दी, चावल, मिठाई, कच्चा दूध, दही, देसी घी, शहद, शक्कर का बूरा, रोली, कुमकुम, मौली, अक्षत, पान, व्रत कथा की पुस्तक, मिट्‌टी या तांबे का टोटवाला करवा और ढक्कन, कलश, चंदन आदि।

करवा चौथ की पूजन विधि

करवा चौथ के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें फिर सास द्वारा दिया हुआ भोजन करें और निर्जला व्रत का संकल्प लें। यह व्रत सूर्य अस्त होने के बाद चन्द्रमा के दर्शन करके ही खोलना चाहिए और बीच में जल भी नहीं पीना चाहिए। संध्या के समय एक मिट्टी की वेदी पर सभी देवताओं की स्थापना करें।इसमें 10 से 13 करवे (करवा चौथ के लिए ख़ास मिट्टी के कलश) रखें। चन्द्रमा निकलने से लगभग एक घंटे पहले पूजा शुरू की जानी चाहिए। अच्छा हो कि परिवार की सभी महिलाएं साथ पूजा करें।

पूजा के दौरान करवा चौथ कथा सुनें या सुनाएं।चन्द्र दर्शन छलनी के द्वारा किया जाना चाहिए और साथ ही दर्शन के समय अर्घ्य के साथ चन्द्रमा की पूजा करनी चाहिए।चन्द्र-दर्शन के बाद बहू अपनी सास को थाली में सजाकर मिष्ठान, फल, मेवे, रूपये आदि देकर उनका आशीर्वाद लें।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। (डेली अभीतक समाचार इसकी पुष्टि नहीं करता है।)

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