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साहित्य मे मनोभावनाओं की कवियत्री हैं ममता जोशी स्नेहा

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*कोशिश कर, हल निकलेगा
आज नहीं तो, कल निकलेगा..
अर्जुन के तीर सा सध
मरूस्थल से भी जल निकलेगा*

ऋषिकेश।आवाज़ साहित्यिक संस्था मे एक बेहतरीन कलम क्रांति की लेखिका, मनोभावनाओं की साहित्यकार श्रीमती ममता जोशी स्नेहा साहित्य के क्षेत्र मे एक जाना पहचाना नाम है जो भले ही लिखने , गाने , एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों मे रुचि अपने विद्यार्थी जीवन से ही सृजन कर चुकी थी लेकिन अध्ययन काल समाप्ति के बाद कुछ समय विराम सा इस क्षेत्र में हो गया था लेकिन प्रतिभा के सामने कोई भी बाधा ज्यादा लंबे समय तक खामोश नहीं रख सकती ऐसा ही ममता जोशी स्नेहा के साथ हुई ।इनका कहना है कि प्रारंभिक शिक्षा बेसिक पाठशाला लिखवारगांव प्रताप नगर ब्लॉक टिहरी गढ़वाल से प्रारंभ हुई इंटरमीडिएट तक गांव मे अध्ययन किया जब मैं नौवीं क्लास में पढ़ती थी तब से मुझे कहानी लिखने का बहुत शौक था मैं कुछ न कुछ लिखती रहती थी यहां तक कि मुझे कबीर दास जी के २००से ज्यादा दोहे याद थे स्कूल मे मेरी सहेलियां मुझे कबीर दास नाम से पुकारते थे।

मैं पढ़ाई के साथ साथ घर का पूरा काम करती थी जंगल, गाय ,भैस, घास काटना, दिन भर काम करती थी अपने मां के संघर्ष को देखती थी तो मेरे मन मे अनेक भावनाएं तैयार जागती थी, विषम परिस्थितियों में भी मेरे परिवार ने हम बहिनों कीपढ़ाई को प्राथमिकता दी ग्रेजुवेशन के बाद पिता जी ने मेरी शादी कर दी बाद एम ए हिंदी और इतिहास से और फिर बीएड अपने पूज्य पति देव की प्रेरणा से किया ससुराल में सबका सहयोग रहा समय कब बीता पता ही नहीं चला लिखने की रुचि तो बहुत थी लेकिन कोई खास मुकाम न मिलने के कारण कुछ अच्छा नहीं कर पाई लेकिन जब पूरा विश्व कोरोना जैसी महामारी से स्तब्ध हो गया।

उस समय कई परिवारों नेअपना बहुत कुछ खोया तो बहुत से लोगों ने कुछ पाया भी है इस समय साहित्य के क्षेत्र में ऑन लाइन, सोशियल मीडिया मे रुचि वाले अनेक साहित्यकारों को अपनी योग्यता का पता चला तो मंच के माध्यम से साहित्यकार साहित्य संस्कृति को आगे ले जाने का काम करने लगे इसी बीच मुझे भी आदरणीय संतोष व्यास जी जो मेरे जीजा जी हैं ने मुझे प्रेरणा देते हुए कहा कि तुम्हारी सृजन क्षमता अच्छी है तुम अपनी रचनाओं को लिखो और संकलन करो प्रवर की जिमेदारी के कारण मैने असमर्थता व्यक्त की, बार -बार प्रेरित करने पर मैने लिखने का निर्णय लिया मुझे लगता था कवि कोई बहुत खास लोग होते होंगे अपने जीजा जी की प्रेरणा ने मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

उसी दिन किसी काव्य मंच पर बेटी की अभिलाषा विषय मिला था और मैंने लिखना शुरु किया मुझे पता ही नहीं चला कब 24 लाइन की कविता तैयार हो गई , दूसरे दिन फिर मंच पर विषय था सहानुभूति १५०० कविता में ५ कविता खास थी जिसमें मेरी रचना भी थी, बस तब क्या लिखने का जुनून बढ़ने लगा सुबह उठकर मैं लिखना शुरु कर देती थी मैं एक दिन में चार से पांच कविताएं लिखती थी मात्र 3 माह बाद मुझे ऋषिकेश की साहित्यिक संस्था आवाज़ द्वारा ऑनलाइन कार्यक्रम में बुलाया गया जिसमें मेरी कोशिश बेहतरीन रही उसके बाद मेरा ऑफलाइन सबसे पहला मंच ऋषिकेश मे श्री भरत मंदिर इंटर कॉलेज का एन सी सी शिविर के बौद्धिक सत्र मे था जिसमे सभी शिक्षक शिक्षिकाओं व स्वयं सेवियों द्वारा मेरी रचनाओं की प्रसंशा की गई।

कुछ समय बाद आवाज साहित्यिक संस्था मुन्नी की रेती ऋषिकेश में हिंदी साहित्य सृजन गौरव सम्मान, और उत्तरकाशी रामलीला मंच द्वारा उत्तराखंड गढ़ गौरव सम्मान से सम्मानित किए गया मेरा जो मेरे लिए बहुत ही प्रेरणा दायक था मेरा सपना है हमारी मातृभाषा और राजभाषा उन्नति पथ पर हो ।

अनेकों राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आज मैं अपनी रचनाओं को ऑन लाइन, और ऑफ लाइन मे प्रस्तुत करती हूं और कई सम्मानों से सम्मानित किए जाने का गौरव प्राप्त हुआ है।
अभी तक लगभग 100 से 150 तक कविताओं का संग्रह कर चुकी हूं जो यथा शीघ्र संकलन की तरफ अग्रसर हो रही है जिसमें मुख्यत – कभी न रुकना सीखा मैंने,

हे राष्ट्र भूमि तेरा अभिनंदन,मैं उत्तराखंड पहाड़ की बेटी,क्यों करते हैं लोग पलायन,क्या लिखू, सत्य सनातन धर्म,देश तो पराया न था,कांटे भी है एक प्रेरणा,वसुंधरा तेरा उपकार आदि अनेक उद्देश्य परक रचनाएं लिखी हैं, ये तो समय ही बताएगा कि आगे कितना इस कार्य को पूरा कर पाती हूं लेकिन मन में पूरे विजय विश्वास के साथ साहित्य के शिखर की और बढ़ने की अभिलाषा का संकल्प लिए चल रही हूं।

जिसमें सबसे बड़ा योगदान मेरे गुरुजनों का प्रेरणांजल पूज्य मातापिता एवं सास ससुर जी का आशीर्वाद , मेरे पूज्य पतिदेव दिनेश जोशी का प्यार जो मुझे सदैव आगे बढ़ने की शक्ति देते हैं और हर पल मेरा सहयोग करते हैं।मेरे दोनों बच्चे अरूणिता जोशी और अरनव जो हर क्षण मेरी रचनाओं को गुनगुनाकर मुझे उत्साहित करते हैं।

 

 

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